35 Nicest Nature Shayari

Nature Shayari

1- आ गया हूँ सब मोह-माया छोड़ के, प्रकृति मैं तेरी गोद में।

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2- सुकून कहीं तो कहीं घाव भी है, ये प्रकृति है जनाब यहाँ धुप भी है और छाँव भी है।

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3- थक गया हूँ रह रहकर सीमेंट की दीवारों में, मन लगता है अब तो बस इन खूबसूरत पहाड़ों में।

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4- मिलना नहीं मुझे जाकर काफिलों से, मुझे तो मोहोब्बत हो गई हैं इन वादियों से।

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5- शहर में जूनून है, मगर गाँव में सुकून है।

Nat8ure Shayari

6- गम का निकाला है खुशियों की आवृति है, यही मेरा प्यार है यही मेरे लिए प्रकृति है।

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7- फितरत साफ़ हो जाए जो कुदरत सी, पूरी हो जाए मेरी एक हसरत सी।

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8- कुदरत जिसने हमे संभाला है अब खुद टूटकर बिखरने लगी है।

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9- वो हरियाली वाले बाघ वो चहचहाती चिड़िया, क्या देख सकेंगी हमारी आने वाली पीढ़ियां।

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10- प्रकृति ने हमे पाला है किसी माँ की तरह, आप इस बचाकर अपना फ़र्ज़ निभा लें ज़रा।

11- आओ लालच ख़त्म कर अपनी फितरत को साफ़ करें, बहुत देर हो जाए इससे पहले कुदरत को साफ़ करें।

12- आओ मोहोब्बत बांटे, ये कुदरत नहीं सिखाती किसी से नफरत करना।

13- इतना खराब कर दिया इंसान ने तुझे, ऐ कुदरत मगर तू आज भी हसीं है।

14- ऐ कुदरत हम भी तेरे ही सँवारे हैं, जहाँ नज़र घुमाऊं बस तेरे ही नज़ारे हैं।

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15- मौसम तो तेरे बच्चों की तरह है, गर्मी हो या ठण्ड तेरे आँचल में पलते हैं।

16- इंसान ने प्रकृति को मार डालने के पूरे प्रयास करे मगर प्रकृति आज भी हर इंसान को पालती है।

17- प्रकृति को बचाने का हल ढूंढो, अपने आने वाली पीढ़ी का कल ढूंढो।

18- प्रकृति तुझे नमन है मेरा, क्या खूबसूरत ये ज़मीन क्या खूबसूरत गगन है तेरा।

19- छाँव में धुप में, प्रकृति तू खूबसूरत लगती है है रूप में।

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20- दिन है कभी तो कभी रात भी है, ज़िन्दगी धुप है कभी तो कभी बरसात भी है।

21- बादल का सिरहाना आसमान की चादर, मदमस्त हवा और शांत सा सागर।

22- प्रकृति आज भी खूबसूरत होती, अगर प्रकृति में इंसान ना होते या फिर इंसानियत होती।

23- पेड़ से सीखिए मुसीबत में भी खड़े रहने का हुनर, वो पतझड़ में भी बिखरता नहीं।

24- ज़मीन पर लेटकर आसमान की चादर ओढ़कर, पहाड़ में पहन ले चूका सारा शहर छोड़कर।

25- क्या पैसा ही सब कुछ है खुद से ये सवाल करो, जिसने ज़िन्दगी दी है उस कुदरत से प्यार करो।

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26- प्रकृति का नाम मत भूलो वरना इंसान का नामो-निशाँ मिट जाएगा।

Nature Shayari 2 Line

27- प्रकति जननी है प्रकृति ही प्रकाश है, जो अब भी ना समझे तो भविष्य विनाश है।

28- विश्व के बाग़ को फोलों से सजाओ, अभी भी वक़्त है प्रकृति को बचाओ।

29- काँटों संग भी फुलों का उग जाना, प्रकृति सिखाती है समझौतों में सुकून पाना।

30- एक पतझड़ में बिखरा पेड़ इसीलिए संवर जाता है क्यूंकि प्रकृति अपने गर्भ में सबर रखती है।

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31- कुछ सीखना ही है तो फूलों से सीखों टूटकर भी खुशबु बिखेर देते हैं।

32- बंद करो ये अत्याचार ज़माने का, वक़्त है ये प्रकृति को बचाने का।

33- साफ़ हवा से बेहतर दवा कोई दूसरी नहीं।

34- सुमति से प्रकृति को क्षति पहुंचाना बंद करें, अब और ना प्रकृति को तंग करें।

35- ऐसा ही है सनम बिलकुल आप से मिलना, जैसे दिन का रात से शाम को मिलना।

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